राहुल गांधी की पीएम मोदी को चुनौती, ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई की चेतावनी
रामलीला मैदान से चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ तीखे तेवर दिखाए। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके भाषण में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के साथ सत्ता की जवाबदेही और आम लोगों के अधिकार प्रमुख मुद्दे रहे।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को सही दिशा में लाने के लिए यह पहला कदम होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि ज्ञानेश कुमार को न केवल पद से हटाया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होगी और उन्हें जेल जाना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी को लेकर भी राहुल ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मोदी जाना भी चाहें तो विपक्ष उन्हें जाने नहीं देगा और उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।
मतदाता सूची और संस्थाओं पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए दावा किया कि एनडीए और विपक्ष के बीच मतों का अंतर करीब तीन प्रतिशत था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद मतदाता सूची से लगभग 15 प्रतिशत नाम हटा दिए गए। उनके अनुसार, यह नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर संवैधानिक संस्थाओं को प्रभावित करने का आरोप भी लगाया।
रोजगार और आर्थिक असमानता का मुद्दा
राहुल ने किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल नहीं मिलने, युवाओं के सामने रोजगार की चुनौती और मजदूरों के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संपत्ति कुछ बड़े उद्योगपतियों के हाथों में केंद्रित होती जा रही है। इस संदर्भ में उन्होंने अडानी और अंबानी का नाम लिया।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति से नफरत पर आधारित नहीं है। उन्होंने मोहब्बत, अहिंसा और भाईचारे की बात करते हुए संविधान की रक्षा का संकल्प दोहराया। शिव की बारात का उदाहरण देकर उन्होंने ऐसे भारत की कल्पना रखी, जहां हर जाति, धर्म और समुदाय को समान सम्मान मिले। उन्होंने दलितों, आदिवासियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा पर भी जोर दिया।



