ओम बिरला बोले- असहमति का सम्मान लोकतंत्र की मजबूती का आधार
जनप्रतिनिधियों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनसेवा को प्राथमिकता देने की अपील, संविधान को बताया देश की आत्मा

लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारों की भिन्नता को टकराव के बजाय संवाद और सुधार का माध्यम बनाया जाना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को हरियाणा के पंचकूला में जनप्रतिनिधियों से सहमति के साथ असहमति का भी सम्मान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचार नए दृष्टिकोण सामने लाते हैं और शासन-प्रशासन की कमियों को दूर करने में मदद करते हैं। संविधान को भारत की आत्मा और नैतिक मार्गदर्शक बताते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों से राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
संविधान पखवाड़े में जुटे वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधि
हरियाणा विधानसभा की ओर से संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बिरला ने राज्य की छह दशक की विकास यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा की प्रगति में संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
किसानों और युवाओं के योगदान को सराहा
उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए उत्पादन बढ़ाने वाले किसानों की सराहना करते हुए खाद्य सुरक्षा में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। सशस्त्र बलों में सेवाएं दे रहे हरियाणा के युवाओं और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
संविधान को बताया राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक
बिरला ने कहा कि संविधान केवल शासन संचालन का दस्तावेज नहीं है, बल्कि इसमें देश की राष्ट्रीय चेतना और करोड़ों नागरिकों की आकांक्षाएं समाहित हैं। संविधान सभा की विचार-विमर्श आधारित प्रक्रिया और डॉ. बीआर आंबेडकर के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विविधताओं के बावजूद भारतीय लोकतंत्र की निरंतर मजबूती इसकी विशेषता है।
कार्यकाल के बाद भी जनसेवा की जिम्मेदारी
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व सदन में कार्यकाल पूरा होने के साथ समाप्त नहीं होता। शासन व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। विशेष रूप से कमजोर वर्गों और समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक विकास का लाभ पहुंचना जरूरी है।
हरियाणा विधानसभा की परंपराओं का उल्लेख
उन्होंने हरियाणा विधानसभा में सार्थक चर्चा, संवाद और सदन की गरिमा बनाए रखने की कार्यसंस्कृति की सराहना की। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता ही उनकी भूमिका को सार्थक बनाती है।
सम्मेलन में वरिष्ठ नेता रहे उपस्थित
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण, नेता प्रतिपक्ष भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, संसदीय कार्य मंत्री महीपाल ढांडा और विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।



