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असंगठित श्रमिकों और गिग वर्कर्स के लिए बनेगा मजबूत सामाजिक सुरक्षा ढांचा, राष्ट्रीय बोर्ड का गठन अधिसूचित

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कामगारों को भी कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में लाने की तैयारी, साल में कम से कम तीन बार होगी बोर्ड की बैठक

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: नई दिल्ली2 मिनट पढ़ें
असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों एवं डिलीवरी पार्टनर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की पहल ।
असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों एवं डिलीवरी पार्टनर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की पहल ।
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असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत असंगठित श्रमिकों, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ाना और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाना है।

सरकार और श्रमिक संगठनों की होगी भागीदारी

राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे। बोर्ड में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक यूनियनों तथा गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के संगठनों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इस तरह विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पक्षों को श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से संबंधित नीतियों और योजनाओं पर विचार रखने का अवसर मिलेगा।

साल में तीन बैठकें करना अनिवार्य

बोर्ड की कार्यप्रणाली को नियमित बनाए रखने के लिए वर्ष में कम से कम तीन बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों के संचालन और कामकाज से संबंधित नियम एवं प्रक्रियाएं केंद्र सरकार निर्धारित करेगी।

कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी भी करेगा बोर्ड

बोर्ड की प्रमुख जिम्मेदारी असंगठित श्रमिकों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की अलग-अलग श्रेणियों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश करना होगी। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर केंद्र सरकार को सलाह दी जाएगी।

केंद्र सरकार की ओर से संचालित सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी, राज्य स्तर पर श्रमिकों के रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था की समीक्षा तथा संबंधित फंड और खातों से होने वाले व्यय का आकलन भी बोर्ड के कार्यक्षेत्र में शामिल रहेगा। सरकार समय-समय पर इसे अन्य जिम्मेदारियां भी सौंप सकेगी।

इस पहल के माध्यम से पारंपरिक असंगठित श्रमिकों के साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था में सेवाएं देने वाले गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा की औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

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