मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले: कंटेनर और खेल उपकरण निर्माण को मिलेगा बढ़ावा, पंचायतों के लिए 7,395 करोड़ की योजना मंजूर
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भी राहत, महंगाई भत्ते व महंगाई राहत में 3 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में विनिर्माण, खेल उद्योग, ग्रामीण शासन और कर्मचारियों की आर्थिक राहत से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। सरकार ने कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना और खेल उपकरण उद्योग के विकास के लिए 1,856.67 करोड़ रुपये के प्रावधान को मंजूरी दी। वहीं, ग्राम पंचायतों की नियोजन और प्रशासनिक क्षमता मजबूत करने के लिए 7,395.55 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को स्वीकृति दी गई। केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत (डीआर) में भी 3 प्रतिशत की वृद्धि मंजूर की गई है, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी।
कंटेनर निर्माण में निवेश और रोजगार बढ़ाने की तैयारी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2039-40 तक 10,000 करोड़ रुपये के कुल बजट वाली कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश में प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण व्यवस्था विकसित करना, आयात पर निर्भरता घटाना और समुद्री परिवहन तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़ी आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना है। योजना के तहत नई इकाइयों की स्थापना और मौजूदा कारखानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने को प्रोत्साहन मिलेगा।
इस योजना में 859 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता का प्रावधान है। पात्र निर्माताओं को पूंजीगत ऋण पर सालाना 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा, पात्र भारतीय निर्माताओं द्वारा तैयार और बेचे जाने वाले कंटेनरों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 8,891 करोड़ रुपये की परिचालन व्यय सहायता निर्धारित की गई है। परीक्षण और प्रमाणन सुविधाओं के विकास के लिए 150 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
सरकार का लक्ष्य देश की सालाना कंटेनर निर्माण क्षमता को बढ़ाकर 7.5 लाख टीईयू तक पहुंचाना है। योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है। इससे कंटेनर निर्माण से जुड़े सहायक उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
खेल उपकरण उद्योग को मिलेगा नया प्रोत्साहन
कैबिनेट ने 2026 से 2033-34 की अवधि के लिए 1,856.67 करोड़ रुपये की खेलो इंडिया खेल उपकरण विनिर्माण योजना को मंजूरी दी है। इसके जरिए घरेलू उत्पादन, तकनीकी नवाचार, निजी निवेश और निर्यात को बढ़ावा देने की तैयारी है। योजना का उद्देश्य भारतीय खेल सामग्री उद्योग को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
इसके तहत खेल उपकरण निर्माण के लिए विशेष क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जहां विनिर्माण इकाइयों के साथ आपूर्तिकर्ता, परीक्षण केंद्र, डिजाइन एवं प्रोटोटाइप सुविधाएं और सहायक उद्यम एकीकृत रूप से काम कर सकेंगे। प्रमुख घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निर्माताओं को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 1,130 करोड़ रुपये का संयुक्त प्रावधान किया गया है।
मौजूदा खेल सामग्री क्लस्टरों के आधुनिकीकरण, साझा बुनियादी ढांचे और एमएसएमई इकाइयों को भी सहायता मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने और उसका नवीनीकरण कराने के लिए 105 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। अनुसंधान, सामग्री विज्ञान, सुरक्षात्मक उपकरणों, आधुनिक विनिर्माण तकनीकों और कौशल विकास को भी योजना का हिस्सा बनाया गया है।
2.55 लाख से अधिक पंचायतों के लिए नई योजना
ग्रामीण स्थानीय शासन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को 2026-27 से 2030-31 तक लागू करने की मंजूरी दी गई है। योजना का कुल परिव्यय 7,395.55 करोड़ रुपये होगा। इसमें केंद्र सरकार 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्य 2,526.07 करोड़ रुपये का योगदान देंगे।
इस पहल से 2.55 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके दायरे में लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और अन्य संबंधित हितधारकों की क्षमता बढ़ाना शामिल है।
योजना के तहत हर साल 2.55 लाख ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करने में सहायता दी जाएगी। ई-ग्रामस्वराज और अन्य मौजूदा डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से सरकारी योजनाओं, उपलब्ध संसाधनों, सामुदायिक परिसंपत्तियों और स्थानीय जरूरतों से जुड़ी जानकारी को एक साझा मंच पर लाने पर जोर रहेगा। इससे पंचायतों को विकास की प्राथमिकताएं तय करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
प्रत्येक समन्वित जागरूकता अभियान के माध्यम से कम से कम एक करोड़ नागरिकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण, ऑनलाइन लेखांकन, ऑडिट और सार्वजनिक वित्तीय जानकारी साझा करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी। इसके तहत उन ग्रामीण स्थानीय निकायों को भी शामिल किया जाएगा, जहां पारंपरिक व्यवस्था के कारण पंचायतें अस्तित्व में नहीं हैं।
डिजिटल नियोजन और जवाबदेही पर रहेगा जोर
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना में ग्राम सभाओं की भागीदारी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं को पंचायत स्तर की प्राथमिकताओं से जोड़ने का प्रयास होगा, ताकि उपलब्ध धन और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।
योजना के अंतर्गत हर साल कम से कम 2.55 लाख ऑनलाइन ऑडिट योजनाओं को तैयार करने और संबंधित ऑडिट समय पर पूरा कराने में सहायता दी जाएगी। पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने, वित्तीय प्रबंधन सुधारने और सार्वजनिक जवाबदेही मजबूत करने के उपाय भी शामिल हैं। बहुभाषी संवाद के लिए 17 भारतीय भाषाओं में एआई आधारित संचार मंच पंचम सहित मौजूदा डिजिटल और जनसंपर्क व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जाएगा।
डीए-डीआर में 3 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए भी मंत्रिमंडल ने राहत को मंजूरी दी है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत में 3 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि की गई है। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी। इसके बाद महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की दर मूल वेतन एवं पेंशन के 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो जाएगी।
इस फैसले से केंद्र सरकार के लगभग 48.54 लाख कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलने का अनुमान है। बढ़ोतरी के कारण सरकारी खजाने पर सालाना 10,016.10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। यह फैसला सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्वीकृत फॉर्मूले के अनुरूप लिया गया है।
विनिर्माण से ग्रामीण शासन तक फैसलों का दायरा
केंद्रीय मंत्रिमंडल के इन फैसलों में औद्योगिक उत्पादन, खेल सामग्री के घरेलू निर्माण, ग्रामीण निकायों की प्रशासनिक क्षमता और कर्मचारियों-पेंशनभोगियों की आर्थिक राहत को शामिल किया गया है। कंटेनर और खेल उपकरण उद्योग के लिए वित्तीय प्रोत्साहन के साथ पंचायतों के डिजिटल नियोजन तथा जवाबदेही को मजबूत करने की पहल भी की गई है।



