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अटलांटा में विदेश मंत्री जयशंकर की मुलाकातों से चर्चा में आया अमेरिकी दौरा, बीजेपी समर्थकों से लेकर क्वाड तक सक्रियता

जी20 और क्वाड की बैठकों में भारत ने उठाए वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े मुद्दे

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: अटलांटा2 मिनट पढ़ें
ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी के सदस्यों के साथ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर।
ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी के सदस्यों के साथ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर।
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विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के अमेरिका दौरे के दौरान अटलांटा में राजनीतिक और कूटनीतिक गतिविधियां एक साथ देखने को मिलीं। जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे जयशंकर ने भारतीय प्रवासियों के साथ ‘ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी’ (ओएफबीजेपी) के सदस्यों से भी मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रसन्नता जाहिर की। भारतीय समुदाय के साथ बातचीत के बाद उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों की उपलब्धियों और उनके योगदान की सराहना की।

जी20 में सप्लाई चेन पर भारत का जोर

अटलांटा में आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में वैश्विक आर्थिक सहयोग, आपूर्ति शृंखला की मजबूती और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के घटनाक्रम प्रमुख चर्चा के विषय रहे। शनिवार को बैठक के तीसरे पूर्ण सत्र में सप्लाई चेन पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान जयशंकर ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित और मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने औद्योगीकरण के अधिकार को बढ़ावा देने तथा शोषणकारी तौर-तरीकों और प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली गतिविधियों का विरोध करने की बात कही।

क्वाड में रणनीतिक सहयोग पर चर्चा

जयशंकर ने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग शामिल हुईं। चर्चा में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, समृद्धि और देशों की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को महत्वपूर्ण बताया गया।

जयशंकर ने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत पर जोर दिया। गैर-बाजार प्रथाओं और क्षेत्र में बढ़ते आर्थिक दबावों से निपटने का मुद्दा भी उठाया।

अमेरिका में कार्यक्रम पूरे करने के बाद जयशंकर एंटीगुआ और बारबुडा जाएंगे। वहां वे राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

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