निवेश से पर्यटन तक, भारत-यूएई सहयोग के नए रास्तों पर मंथन
विदेश सचिव विक्रम मिस्री की अबू धाबी यात्रा में आर्थिक साझेदारी, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने आर्थिक संबंधों को विस्तार देने के साथ निवेश, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग के नए अवसर तलाशने पर सहमति के संकेत दिए हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक व्यावसायिक साझेदारी, निवेश प्रवाह और व्यापक रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।
निवेश और कारोबारी साझेदारी पर चर्चा
मिस्री ने अबू धाबी के वित्त विभाग के अध्यक्ष और एल’इमाद होल्डिंग कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं ग्रुप सीईओ जासिम मोहम्मद बू अताबा अल जाबी से मुलाकात की। बैठक में निवेश संबंधों को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच पूंजी प्रवाह बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इस अवसर पर विदेश मंत्रालय में खाड़ी मामलों के अतिरिक्त सचिव असीम महाजन और यूएई में भारत के राजदूत दीपक मित्तल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
संस्कृति और पर्यटन में सहयोग के अवसर
विदेश सचिव ने अबू धाबी के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अध्यक्ष मोहम्मद खलीफा अल मुबारक से भी मुलाकात की। इस बातचीत में सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने, पर्यटन क्षेत्र में सहयोग तथा ‘हाउस ऑफ इंडिया’ जैसी पहल के जरिए नए अवसर विकसित करने पर चर्चा हुई।
रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा
यात्रा के दौरान मिस्री ने यूएई की अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री और भारत के लिए विशेष दूत रीम अल हाशिमी के साथ भी बैठक की। दोनों पक्षों ने रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न आयामों की समीक्षा की। इसके अलावा पश्चिम एशिया के हालात और साझा हितों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
संबंधों को नई गति देने की प्रतिबद्धता
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के बीच जारी उच्चस्तरीय संपर्कों का हिस्सा थी। इससे व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत हुई प्रगति का आकलन करने और भविष्य के सहयोग की दिशा तय करने का अवसर मिला। दोनों देशों ने आपसी विश्वास और रणनीतिक समझ के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।



