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नरवाई प्रबंधन से लेकर बहुफसलीय खेती तक, इंदौर में किसानों को बताए आधुनिक कृषि के तरीके

आत्मा योजना की परिचर्चा में कृषि विशेषज्ञों ने फसल अवशेषों के वैज्ञानिक निस्तारण और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर दिया जोर

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश2 मिनट पढ़ें
कृषि परिचर्चा के दौरान नरवाई प्रबंधन और आधुनिक खेती के तरीकों पर किसानों को जानकारी देते विशेषज्ञ।
कृषि परिचर्चा के दौरान नरवाई प्रबंधन और आधुनिक खेती के तरीकों पर किसानों को जानकारी देते विशेषज्ञ।
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फसल अवशेषों का उचित उपयोग, मिट्टी की उर्वरा शक्ति का संरक्षण और खेती में आधुनिक तकनीकों को अपनाना किसानों के लिए महत्वपूर्ण विषय बनते जा रहे हैं। इन्हीं पहलुओं पर चर्चा के लिए इंदौर स्थित राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (एनएसआरआई) में 4 नवंबर को आत्मा योजना के तहत कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें किसानों को नरवाई प्रबंधन, फसल विविधीकरण और कृषि यंत्रों के इस्तेमाल से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई।

फसल अवशेष जलाने के विकल्पों की दी जानकारी

परियोजना संचालक (आत्मा) शर्ली थॉमस ने कहा कि किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने के साथ इसके वैज्ञानिक प्रबंधन के विकल्पों से परिचित कराना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने उचित प्रबंधन को पर्यावरण संरक्षण और खेतों की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया।

कटाई के साथ अवशेष प्रबंधन पर जोर

संयुक्त संचालक कृषि जितेन्द्र सिंह ने हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) के इस्तेमाल की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से कटाई के दौरान ही फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र की डॉ. अपर्णा वाजपेयी ने नरवाई प्रबंधन और फसल कटाई के वैकल्पिक तरीकों की जानकारी देते हुए वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाने पर जोर दिया।

कृषि मशीनों की कार्यप्रणाली समझाई

कृषि अभियांत्रिकी विभाग के भार्गव ने नरवाई प्रबंधन में उपयोग होने वाले आधुनिक कृषि यंत्रों, उनके संचालन और तकनीकी पहलुओं के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को इन मशीनों का प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया।

बहुफसलीय खेती के अनुभवों पर भी चर्चा

परिचर्चा में जिले के प्रगतिशील किसानों ने अपने खेतों में नरवाई प्रबंधन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बहुफसलीय प्रणाली के जरिए एक ही कृषि वर्ष में अलग-अलग फसलों का उत्पादन लेने की जानकारी भी दी। इस अवसर पर सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के डॉ. दुपारे और कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य चौहान मौजूद रहे।

वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का मिला अवसर

कार्यक्रम में शामिल किसानों ने विशेषज्ञों से खेती संबंधी सवाल पूछे और अपनी समस्याओं पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। परिचर्चा के समापन पर उप परियोजना संचालक (आत्मा) कल्पना वर्मा ने अतिथियों, कृषि वैज्ञानिकों और किसानों का आभार व्यक्त किया।

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