नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 53,866 करोड़ का बड़ा करार, बनेंगे 8 अत्याधुनिक युद्धपोत
स्वदेशी निर्माण को मिलेगी नई रफ्तार, दो भारतीय शिपयार्ड को सौंपी गई जिम्मेदारी

भारतीय नौसेना की समुद्री युद्धक क्षमता को नई मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने आठ अत्याधुनिक युद्धपोतों के निर्माण का बड़ा फैसला जमीन पर उतार दिया है। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट्स (एनजीसी) के निर्माण के लिए 53,866.50 करोड़ रुपये के रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। इस परियोजना से न केवल नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि देश के स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और रोजगार के अवसरों को भी व्यापक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
दो भारतीय शिपयार्ड बनाएंगे आठ कॉर्वेट्स
रक्षा मंत्रालय ने ये अनुबंध गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) के साथ किए हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। परियोजना के तहत जीआरएसई पांच और जीएसएल तीन युद्धपोतों का निर्माण करेगी।
इस परियोजना की खास बात यह है कि भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए युद्धपोतों का निर्माण पहली बार प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को सौंपा गया है।
तीन मोर्चों पर कार्रवाई की क्षमता
इन कॉर्वेट्स को आधुनिक मिसाइलों, उन्नत हथियार प्रणालियों और अत्याधुनिक सेंसरों से लैस किया जाएगा। इनकी संरचना ऐसी होगी कि ये हवाई खतरों से मुकाबला करने के साथ सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों और समुद्र के भीतर सक्रिय पनडुब्बियों के खिलाफ भी अभियान चला सकेंगे।
नए युद्धपोतों के नौसेना में शामिल होने से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, तटीय रक्षा, समुद्री निगरानी और तटीय जलक्षेत्रों में सैन्य अभियानों की क्षमता बढ़ेगी। इससे भारतीय नौसेना की समुद्र में प्रभावी मौजूदगी भी मजबूत होगी।
रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना का असर जहाज निर्माण उद्योग से आगे तक पहुंचेगा। अगले दस वर्षों में शिपयार्डों में लगभग 72 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने का अनुमान है। वहीं सहायक उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को करीब 460 लाख मानव-दिवस के रोजगार का लाभ मिलने की संभावना है।
यह परियोजना देश में जहाज निर्माण से जुड़े उद्योगों की क्षमता बढ़ाने और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इनमें करीब 82 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योगों से किए जाने का प्रावधान है। आठ नए कॉर्वेट्स का निर्माण भी घरेलू रक्षा विनिर्माण को प्राथमिकता देने की इसी रणनीति का हिस्सा है।



