भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग में नई पहल, तकनीक और संयुक्त उत्पादन पर जोर
10 वर्षीय रक्षा ढांचे की समीक्षा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर भी बनी सहमति

भारत और अमेरिका ने अपनी रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने के लिए सैन्य तकनीक, खुफिया एवं अन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के बीच हुई बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की प्रगति की समीक्षा की गई। बातचीत का प्रमुख केंद्र दीर्घकालिक रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना रहा।
10 वर्षीय रक्षा ढांचे की समीक्षा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार, 28 अक्टूबर को फिलीपींस के सेबू में 13वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) से इतर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के 10 वर्षीय रक्षा ढांचे के अंतर्गत अब तक हुई प्रगति पर चर्चा की। बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने बातचीत को बेहद अच्छा बताया और कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग को मजबूत करने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
सैन्य तकनीक और संयुक्त उत्पादन पर ध्यान
बैठक में रक्षा तकनीक, सूचनाओं के आदान-प्रदान और रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया। इन क्षेत्रों में तालमेल बढ़ाने का उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा संबंधों को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाना है। 10 वर्षीय रक्षा ढांचा इसी दीर्घकालिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का आधार है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर साझा दृष्टिकोण
राजनाथ सिंह ने भारत और अमेरिका की साझेदारी को स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। दोनों देशों के रक्षा संबंध क्षेत्र में शांति और सुरक्षा से जुड़े साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
आसियान के साथ सहयोग भी प्राथमिकता
सेबू में 28 और 29 अक्टूबर को आयोजित एडीएमएम-प्लस बैठक के दौरान राजनाथ सिंह विभिन्न भागीदार देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी कर रहे हैं। इस मंच पर रक्षा सहयोग की समीक्षा और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हो रही है। भारत अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा सामूहिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाना भी इस क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद का महत्वपूर्ण पहलू है।



