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वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की आर्थिक रफ्तार मजबूत, 7.35% वृद्धि का अनुमान

उद्योग से निर्यात तक मजबूती के संकेत, घरेलू मांग और महंगाई का संतुलन बनाए रखना अगली चुनौती

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: नई दिल्ली3 मिनट पढ़ें
भारत की रफ्तार बरकरार
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भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती का रुख बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त मंत्रालय की अक्टूबर की मासिक आर्थिक समीक्षा में औद्योगिक उत्पादन, ऊर्जा खपत, बंदरगाहों पर माल ढुलाई, जीएसटी संग्रह और वाहन बिक्री जैसे संकेतकों को आर्थिक गतिविधियों में तेजी का आधार बताया गया है। इन आंकड़ों से घरेलू मांग में मजबूती के संकेत भी मिले हैं।

पहली तिमाही के बाद भी विकास की गति कायम

समीक्षा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई थी। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में प्रस्तुत नाउकास्टिंग मॉडल के आधार पर दूसरी तिमाही के लिए 7.35 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। यह अनुमान आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विभिन्न संकेतकों के आकलन पर आधारित है।

औद्योगिक उत्पादन और विनिर्माण में तेजी

जुलाई से सितंबर के दौरान औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती दिखाई दी। अगस्त 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसमें विनिर्माण क्षेत्र की 9 प्रतिशत वृद्धि की अहम भूमिका रही। वहीं, सितंबर में प्रमुख उद्योगों के सूचकांक (आईसीआई) में 7.9 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह आंकड़ा प्रारंभिक है।

विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में भी विस्तार हुआ। सितंबर में एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अगस्त के 52.8 से बढ़कर 55.1 पर पहुंच गया। मंत्रालय के अनुसार, नीतिगत कदमों, निवेश और कंपनियों में हो रहे बदलावों से घरेलू विनिर्माण क्षमता, स्थानीयकरण और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं।

निर्यात में बढ़ोतरी, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सितंबर 2026 में भारत के वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वस्तुओं के निर्यात में 23.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उत्पादों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

16 अक्टूबर 2026 तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 721 अरब डॉलर था। समीक्षा में आगे विनिर्माण का दायरा बढ़ाने, घरेलू मूल्य संवर्धन को मजबूत करने, आपूर्ति शृंखला में सुधार और निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।

बैंक ऋण में वृद्धि, महंगाई पर रहेगी नजर

वित्तीय बाजारों में वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी और शेयर बाजारों के उतार-चढ़ाव का असर सीमित रहने की बात समीक्षा में कही गई है। मुद्रा बाजार में गतिविधियां सुचारू रहीं और बाजार दरें नीतिगत रेपो दर के आसपास बनी रहीं। खुले बाजार परिचालन के जरिए नकदी का प्रबंधन किया गया। बैंक ऋण में सालाना आधार पर 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

हालांकि, दूसरी छमाही में आर्थिक वृद्धि के साथ मूल्य स्थिरता बनाए रखना नीति-निर्माताओं के लिए अहम रहेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, खाद्य महंगाई और खरीफ फसल को लेकर अनिश्चितता चुनौती बनी हुई हैं। समीक्षा के अनुसार, महंगाई के दूसरे दौर के प्रभाव को सीमित करने में हालिया दर वृद्धि के असर के साथ केंद्रीय बैंक का सक्रिय नकदी प्रबंधन भी महत्वपूर्ण होगा।

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