भारत-ईयू व्यापार समझौते पर इसी साल मुहर की उम्मीद, साझेदारी को विस्तार देने पर जोर
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल से की चर्चा, व्यापार से लेकर तकनीक और अनुसंधान तक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाने की पहल

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को इसी वर्ष अंतिम रूप मिलने और उस पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई गई है। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित संसद भवन में यूरोपीय संसद की विदेश मामलों की समिति (एएफईटी) के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने पर जोर दिया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डेविड मैकलिस्टर ने किया।
साझा हितों से मजबूत होगी वैश्विक साझेदारी
राधाकृष्णन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति हुई है। दोनों पक्ष दुनिया के बड़े लोकतांत्रिक समूहों और खुली बाजार अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। विविधता, बहुलतावाद और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर दोनों एक मजबूत, लचीली और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
उच्चस्तरीय संपर्कों से सहयोग को मिला विस्तार
उपराष्ट्रपति ने वर्ष 2025 में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के नेतृत्व में हुए भारत दौरे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में सरकार के विभिन्न संबंधित विभागों को शामिल करते हुए समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया, जिससे संस्थागत संबंधों को मजबूत करने और सहयोग के ठोस परिणाम हासिल करने का रास्ता खुला।
उन्होंने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष की भारत यात्रा तथा 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के संदर्भ में भी साझेदारी को मिली गति का उल्लेख किया। दोनों नेताओं ने भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया था।
करीब दो अरब लोगों के बाजार पर नजर
व्यापार और निवेश को दोनों पक्षों के संबंधों का अहम आधार बताते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ का संयुक्त बाजार लगभग 25 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का है और यह करीब दो अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को ‘सभी समझौतों की जननी’ बताते हुए इसी वर्ष इस पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई। साथ ही, समझौते को अंतिम रूप देने और उसे साकार करने में यूरोपीय संसद से सहयोग का आग्रह किया।
तकनीक और अनुसंधान में भी साझेदारी
उपराष्ट्रपति ने भारत-ईयू व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) को रणनीतिक समन्वय का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने ‘होराइजन यूरोप’ कार्यक्रम में भारत की भागीदारी से संबंधित वार्ताएं पूरी होने पर संतोष जताया। उनके अनुसार, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार में सहयोग बढ़ने से द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिल सकती है।
बैठक में राधाकृष्णन ने स्पेन में हुए रेल हादसे पर संवेदना व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूति जताई। इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा, सुरेंद्र सिंह नागर, अमर पाल मौर्य और पी. टी. उषा भी मौजूद रहे। ये सांसद भारत-जर्मनी और भारत-पोलैंड संसदीय मैत्री समूहों से जुड़े हैं।



