महंगाई और आवास संकट पर यूरोप में उबाल, पांच देशों में हिंसक प्रदर्शन; मिलान में 500 सैनिक तैनात
फ्रांस में करीब एक हजार लोग हिरासत में, छात्रों से लेकर पेंशनभोगियों तक ने सरकारों के खिलाफ खोला मोर्चा

यूरोप के कई देशों में महंगाई, आवास संकट, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों के खिलाफ जनआक्रोश तेज हो गया है। फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल और अल्बानिया में सप्ताहांत के दौरान बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। कई जगह प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना पड़ा, जबकि इटली के मिलान में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए।
फ्रांस में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां
फ्रांस में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दौरान आयोजकों ने करीब आठ लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया, जबकि आधिकारिक अनुमान लगभग 4.10 लाख का रहा। पेरिस सहित कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव हुआ। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार, अशांति के आरोप में करीब एक हजार लोगों को हिरासत में लिया गया। वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेंशों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि डोनल्ड ट्रंप ने फ्रांस की आव्रजन नीतियों को अशांति की वजह बताया।
इटली में सैनिक तैनात, अल्बानिया में भड़के छात्र
इटली के रोम, मिलान और अन्य प्रमुख शहरों में युवाओं ने सरकारी नीतियों के खिलाफ मार्च निकाला। उपद्रव की आशंका के बीच मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए। विभिन्न शहरों में गिरफ्तारियों और एहतियाती हिरासत की कार्रवाई भी हुई।
अल्बानिया में छात्र शिक्षा बजट बढ़ाने, फीस घटाने और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। तिराना में प्रदर्शन के दौरान कृषि मंत्रालय के मुख्य द्वार में आग लगाने और सरकारी कार्यालयों पर पथराव की घटनाएं सामने आईं।
स्पेन-पुर्तगाल में पेंशन और मकानों का मुद्दा
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में लोगों ने बेहतर पेंशन, न्यूनतम वेतन के अनुरूप पेंशन और निजीकरण रोकने की मांग की। बढ़ते किराये और मकानों की महंगी कीमतों ने भी नाराजगी बढ़ाई है।
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में आवास संकट के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने रॉसियो स्क्वायर पर 100 से अधिक तंबू लगाए, जिन्हें बाद में पुलिस ने हटाया। प्रदर्शनकारी किरायेदारों को बेदखल करने की प्रक्रिया आसान बनाने वाले प्रस्तावित कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वहीं, बढ़ती कीमतों और मकानों की कमी ने युवाओं के लिए घर खरीदना मुश्किल बना दिया है।
पांचों देशों में हुए प्रदर्शनों ने महंगाई, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बढ़ते असंतोष को सामने ला दिया है।



