अब हर कक्षा में सिखाए जाएंगे स्वच्छ खेल के संस्कार, सरकार ने यूनेस्को से मिलाया हाथ
सम्मान, ईमानदारी और निष्पक्षता को बच्चों की शिक्षा का हिस्सा बनाने के लिए तीन संस्थाओं के बीच हुआ अहम समझौता

खेल में जीत हासिल करने की कोशिश के साथ नियमों का सम्मान करना, ईमानदारी बरतना और निष्पक्ष रहना भी जरूरी है। इन्हीं मूल्यों को बचपन से विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने शिक्षा और खेल को जोड़ने की दिशा में नई पहल की है। इसके तहत देशभर के स्कूलों में ‘हर कक्षा में खेल मूल्य’ टूलकिट के माध्यम से स्वच्छ खेल की भावना को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पहल के लिए युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और यूनेस्को के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया।
कक्षा से खेल के मैदान तक पहुंचेगी पहल
दिल्ली में नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (नाडा) इंडिया के क्लीन स्पोर्ट कॉन्क्लेव के दौरान यह समझौता हुआ। इसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई और खेल गतिविधियों के माध्यम से सम्मान, ईमानदारी तथा निष्पक्षता जैसे मूल्यों से जोड़ना है। टूलकिट के वीडियो मॉड्यूल 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई जा सके। यह कदम खेलो इंडिया नीति 2025 में खेल और शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की प्राथमिकता के अनुरूप है।
मांडविया ने डोपिंग रोकथाम पर दिया जोर
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ उसकी शुचिता बनाए रखना भी आवश्यक है। प्रतिभा, अनुशासन और मेहनत के साथ ईमानदारी, निष्पक्षता और भरोसा खेल की बुनियादी जरूरतें हैं। उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स और एशियन पैरा गेम्स में भारत का चौथे स्थान पर रहना देश की बढ़ती खेल क्षमता को दर्शाता है, लेकिन डोपिंग की चुनौती से निपटने के लिए शिक्षा, रोकथाम, जांच और नियमों के प्रभावी पालन पर लगातार ध्यान देना होगा।
हजारों जांच और जागरूकता सत्र आयोजित
मांडविया के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान नाडा इंडिया ने 7,000 से अधिक डोपिंग टेस्ट किए और 350 से ज्यादा शिक्षा एवं जागरूकता सत्र आयोजित किए। इनमें 27,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय और हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा एवं शोध संस्थान में सप्लीमेंट की जांच संबंधी सुविधाएं अनजाने में डोपिंग के मामलों को रोकने में मदद करेंगी।
उन्होंने नाडा की जांच व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत करने की बात भी कही। साथ ही, डोपिंग से जुड़ी गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में लाने के लिए संसद में नियम लाने की तैयारी का उल्लेख किया।
शिक्षा और खेल के बीच दूरी घटाने की कोशिश
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि इस समझौते से पढ़ाई और खेल के बीच लंबे समय से बने अंतर को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने जमीनी स्तर पर खेल के अवसर बढ़ाने और युवा खिलाड़ियों के लिए बेहतर रास्ते तैयार करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, खेल मूल्यों को शिक्षा का हिस्सा बनाने से बच्चों में जिम्मेदारी, ईमानदारी और निष्पक्ष व्यवहार की भावना विकसित की जा सकती है।
शिक्षकों की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
यूनेस्को के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक टिम कर्टिस ने इस पहल को भारत के साथ संगठन की साझेदारी में नया अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यह मॉडल लाखों युवाओं तक पहुंचने और दूसरे देशों के लिए भी सीखने का अवसर बन सकता है। टूलकिट में दिए गए संसाधनों को व्यवहार में उतारने के लिए शिक्षकों की भूमिका अहम होगी। बच्चों के रोजमर्रा के व्यवहार और खेल के दौरान नियमों के पालन से ही इन मूल्यों की वास्तविक परीक्षा होती है।
कॉन्क्लेव में शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव टीके अनिल कुमार, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के खेल सचिव हरि रंजन राव, नाडा के महानिदेशक अनंत कुमार और अंतरराष्ट्रीय भाला फेंक खिलाड़ी सचिन यादव सहित कई अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यूनेस्को एंटी-डोपिंग कन्वेंशन की कानूनी बैठक में शामिल अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।



