CJP नेताओं की जमानत में क्यों फंसा पेच? सोमवार को सामने आईं कोर्ट के आदेश की ये बातें
जमानतदारों की पहचान पर उठे सवाल, 21 अक्टूबर तक बढ़ी थी न्यायिक हिरासत

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत का मामला सोमवार, 19 अक्टूबर को चर्चा में रहा। दोनों की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाए जाने से जुड़े विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के लिखित आदेश में जमानतदारों की पहचान और उनकी उपयुक्तता को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। अदालत ने दोनों नेताओं की ओर से पेश किए गए जमानतदारों को स्वीकार नहीं करने के पीछे के कारण भी बताए।
बांड के कथित उल्लंघन का आदेश में उल्लेख
मजिस्ट्रेट ने आदेश में कहा कि दोनों नेताओं ने 11 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत अपने बांड का कथित तौर पर जानबूझकर उल्लंघन किया और इसके बाद सार्वजनिक शांति भंग हुई। आदेश के मुताबिक, जांच अधिकारी की ओर से पेश सामग्री और आरोपियों के आचरण को देखते हुए अदालत भविष्य में ऐसी घटना नहीं दोहराने के उनके आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुई।
जमानतदारों की पहचान पर क्यों उठे सवाल ?
आदेश में दोनों नेताओं की ओर से पेश किए गए नए जमानतदारों की व्यक्तिगत जांच का उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक, एक जमानतदार के बांड और पहचान पत्र पर लगी तस्वीरों में स्पष्ट अंतर पाया गया। उससे अन्य पहचान पत्र मांगा गया, लेकिन वह पेश नहीं कर सका और संतोषजनक जवाब भी नहीं दे पाया।
दूसरे जमानतदार से पूछताछ के दौरान वह उस व्यक्ति के माता-पिता के नाम और पते जैसी बुनियादी जानकारी नहीं बता सका, जिसके लिए वह जमानतदार बनने आया था। मजिस्ट्रेट ने इन परिस्थितियों के आधार पर दोनों जमानतदारों की उपयुक्तता पर सवाल उठाए।
दो दिन में जवाब और नए जमानतदारों की सूची देने का निर्देश
अदालत ने सार्वजनिक शांति भंग होने और अव्यवस्था की आशंका का उल्लेख करते हुए दोनों पक्षों को दो दिन के भीतर लिखित जवाब और नए जमानतदारों की सूची दाखिल करने का अवसर दिया। इसी अवधि के दौरान दोनों नेताओं को 21 अक्टूबर 2026 तक न्यायिक हिरासत में रखने का निर्देश दिया गया।
CJP ने जमानत प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, CJP ने आरोप लगाया कि उसके नेताओं की ओर से पेश किए गए जमानतदारों को स्वीकार नहीं किया गया। पार्टी की ओर से पेश वकीलों ने दावा किया कि यह कार्रवाई कानून और जमानतदारों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के अनुरूप नहीं है। वकीलों के मुताबिक, पिछले चार दिनों में आठ अलग-अलग लोगों को जमानतदार के रूप में खारिज किया गया।
इस मामले में अदालत के आदेश में जमानतदारों की पहचान और उपयुक्तता पर सवाल दर्ज हैं, जबकि CJP ने जमानत प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाए जाने का यह घटनाक्रम 19 अक्टूबर को सामने आया था।



