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डीपीडीपी कानून से पत्रकारिता की आजादी पर असर नहीं पड़ेगा: अश्विनी वैष्णव

केंद्र का दावा—खबर प्रकाशित करने या स्रोत की पहचान बताने के लिए अनुमति लेना अनिवार्य नहीं

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: नई दिल्ली3 मिनट पढ़ें
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव
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डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 को लेकर मीडिया जगत में उठ रही चिंताओं के बीच केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि यह कानून पत्रकारिता की स्वतंत्रता को सीमित नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के बारे में खबर प्रकाशित करने से पहले उसकी अनुमति लेना या खबर के स्रोत का खुलासा करना इस कानून के तहत अनिवार्य नहीं है।

पत्रकारिता की स्वतंत्रता सुरक्षित रखने का दावा

वैष्णव ने बुधवार को कहा कि डीपीडीपी अधिनियम तैयार करते समय पत्रकारिता की आजादी को प्रभावित करने का कोई उद्देश्य नहीं था। उनके मुताबिक, निजता की सुरक्षा से संबंधित यह कानून मीडिया को स्वतंत्र रूप से खबरें प्रकाशित करने से नहीं रोकता। उन्होंने बताया कि निजता को मौलिक अधिकार मानने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस कानून की जरूरत महसूस की गई थी।

कानून बनाने से पहले हुआ सार्वजनिक परामर्श

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अधिनियम तैयार करने से पहले व्यापक सार्वजनिक परामर्श किया गया था, जिसमें उद्योग जगत ने भी भाग लिया। उन्होंने दावा किया कि परामर्श प्रक्रिया के दौरान कानून के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया और इसके किसी प्रावधान का उद्देश्य पत्रकारिता की स्वतंत्रता का उल्लंघन करना नहीं है।

खबर और उसके स्रोत को लेकर स्पष्टीकरण

मीडिया संगठनों की आशंकाओं पर वैष्णव ने कहा कि पत्रकारों को किसी व्यक्ति का उल्लेख करने वाली खबर प्रकाशित करने से पहले संबंधित व्यक्ति की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। इसी तरह, कानून में पत्रकारों को अपने समाचार स्रोतों की पहचान सार्वजनिक करने के लिए बाध्य करने वाला कोई प्रावधान नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला

डीपीडीपी अधिनियम को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। यह संगठन 21 प्रमुख समाचार संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। याचिका में आशंका जताई गई है कि पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट नहीं होने से खोजी पत्रकारिता और जनहित से जुड़े समाचारों पर असर पड़ सकता है।

व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल पर मीडिया की चिंता

डीएनपीए ने व्यक्तिगत डिजिटल डेटा के प्रसंस्करण से जुड़े प्रावधानों को लेकर सवाल उठाए हैं। मीडिया संगठनों की चिंता है कि कई बार खोजी खबरों और सार्वजनिक हित के मामलों में व्यक्तिगत जानकारी जुटाना तथा उसका इस्तेमाल करना जरूरी होता है। ऐसे में कानून के प्रावधान पत्रकारिता के कामकाज को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं, यह इस विवाद का प्रमुख मुद्दा है।

अगस्त 2023 में संसद ने पारित किया था अधिनियम

संसद ने अगस्त 2023 में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम पारित किया था। इसका उद्देश्य डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और उसके प्रसंस्करण को नियंत्रित करना है। कानून के तहत व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल संबंधित व्यक्ति की सहमति या अधिनियम की धारा 7 में निर्धारित कुछ वैध उपयोगों के आधार पर किया जा सकता है।

केंद्र सरकार का कहना है कि कानून पत्रकारिता की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालता, जबकि डीएनपीए ने पत्रकारिता संबंधी गतिविधियों के लिए स्पष्ट सुरक्षा की जरूरत उठाई है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर रहेगी।

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