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2030 तक पूर्वोत्तर में 8 लाख रोजगार का लक्ष्य, NCDC को मिला 25 साल का रोडमैप बनाने का निर्देश

सहकारी क्षेत्र की वित्तीय ताकत बढ़ाने और ग्रामीण आजीविका के नए अवसर तैयार करने पर केंद्र का जोर

लेखक: कपिल माखीजा, जनशक्ति उजालास्थान: नई दिल्ली3 मिनट पढ़ें
बैठक के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ।
बैठक के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ।
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केंद्र सरकार ने सहकारी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनाने की दिशा में दीर्घकालीन रणनीति तैयार करने पर जोर दिया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को अगले 25 वर्षों का रोडमैप बनाने और वर्ष 2030 तक पूर्वोत्तर में पशुपालन, डेयरी तथा मत्स्य क्षेत्र के माध्यम से आठ लाख रोजगार के अवसर सृजित करने के लक्ष्य पर काम करने के निर्देश दिए।

वित्तीय क्षमता बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली में आयोजित NCDC की महापरिषद की 93वीं बैठक में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के अनुरूप सहकारिता को सर्वसमावेशी विकास का माध्यम बनाना जरूरी है। उन्होंने निगम की संस्थागत संरचना, पूंजी जुटाने, वित्तीय स्वायत्तता और पेशेवर कार्यप्रणाली में सुधार के लिए व्यापक योजना तैयार करने को कहा।

पांच वर्षों में बढ़ा वित्तीय दायरा

शाह ने पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन को निगम का स्वर्णिम काल बताते हुए ऋण वितरण में वृद्धि और शून्य नेट एनपीए की सराहना की। वित्त वर्ष 2025-26 में NCDC ने 1,27,596 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की और 1,475 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। अक्टूबर 2026 तक सहकारी संस्थाओं को कुल वित्तीय सहायता 4.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही।

पूर्वोत्तर और ग्रामीण आजीविका पर फोकस

सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर में संबंधित क्षेत्रों के विकास से आय में करीब 32,800 करोड़ रुपये की वृद्धि और आठ लाख रोजगार के अवसर तैयार करना है। शाह ने राज्य सरकारों के सहयोग से व्यावहारिक परियोजनाएं बनाने को कहा। छोटे किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और ग्रामीण महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

वित्तपोषण के लिए नए मॉडल

NCDC को वित्त वर्ष 2026-27 में 1.70 लाख करोड़ रुपये, 2027-28 में 2.10 लाख करोड़ और 2028-29 में 2.50 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय संवितरण लक्ष्य की दिशा में काम करना है। आगे के वर्षों के लिए भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे गए हैं। इसके लिए नाबार्ड, सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के साथ सह-वित्तपोषण की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।

बैठक में सहकारी चीनी मिलों के लिए नए कारोबारी मॉडल, युवाओं को सहकारी संस्थाओं से जोड़ने, नवाचार को प्रोत्साहन तथा किसान उत्पादक संगठनों के विस्तार पर भी चर्चा हुई। ‘सहकार नवाचार योजना’ के तहत पात्र संस्थाओं को 25 लाख रुपये तक अनुदान देने का प्रावधान है। शाह ने पेशेवर प्रबंधन और सहकारिता के मूल सिद्धांतों के समन्वय से ग्रामीण समृद्धि तथा रोजगार सृजन को गति देने की आवश्यकता बताई।

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